धाम पीठाधीश्वर
साहेब अखंड तीरथ, गुरु पग चारो धाम।
सरकार शरण नित जाइ, दुःख मिटे लेत नाम।
महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री देवेन्द्र दास जी महाराज
साहेब मार्ग के प्रकाश स्तंभ, गुरु-भक्ति की जीवंत प्रतिमूर्ति और धर्म-प्रचार के प्रखर साधक हैं। आप श्री साहेब बाबा धाम के पीठाधीश्वर के रूप में विराजमान हैं। करुणानिधान श्री साहेब बाबा की दिव्य कृपा तथा तपस्या से प्राप्त आशीर्वाद के संरक्षण में, महाराज श्री धर्म, अनुशासन, भक्ति और सेवा के पावन मूल्यों को देश–विदेश में फैलाने हेतु निरंतर तत्पर रहते हैं।
आध्यात्मिक व्यक्तित्व
महामंडलेश्वर श्री देवेंद्र दास जी महाराज का व्यक्तित्व सरलता में विशालता, विनम्रता में तेज, और करुणा में धर्म-बल के संगम का दिव्य उदाहरण है।
आपका जीवन समर्पित है —
- साहेब सिद्धांत
- गुरु-भक्ति और सेवा
- मानव कल्याण
- आध्यात्मिक जागरण
- सत्व, सदाचार और चरित्र निर्माण
- मार्गदर्शन और प्रेरणा
महाराज श्री का वचन भक्तों को प्रेरित करता है —
“साहेब का नाम जीवन का सबसे सुरक्षित मार्ग है;
जो साहेब पर छोड़ दे, उसके जीवन में कमी नहीं रहती।”
आपकी शिक्षा
भक्ति, सेवा, समर्पण
साहेब कृपा सभी भक्तों के हृदय को स्पर्श करती है।
आध्यात्मिक सेवाएँ : महाराज श्री के नेतृत्व में साहेब बाबा धाम में —
- नियमित गुरु दरबार
- ध्यान–साधना कार्यक्रम
- सत्संग–प्रवचन
- मानव सेवा / अन्न सेवा
- नशा मुक्ति / सदाचार जागरण
- सामाजिक–आध्यात्मिक मार्गदर्शन
निरंतर सम्पन्न होते रहते हैं।
भक्तों के प्रति कृपा
महाराज श्री की उपस्थिति से धाम में अनुभूति, शांति और भक्ति–रस का अलौकिक वातावरण बना रहता है। जो भी सच्चे भाव से धाम में आता है — आश्वासन, समाधान और संतोष लेकर लौटता है।
निष्कर्ष
महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री देवेंद्र दास जी महाराज साहेब मार्ग के जीवन्त वाहक, भक्ति और सेवा के पथप्रदर्शक, और करोड़ों भक्तों के आध्यात्मिक आश्रय हैं। साहेब भक्ति की ज्योति को संसार में प्रज्वलित करने का अद्भुत उत्तरदायित्व आपके दिव्य नेतृत्व में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
भव्य मंदिर निर्माण हेतु
गर्भगृह, मंडप एवं तलाब परिक्रमा मार्ग से युक्त | दैनिक पूजन-अर्चन, महाआरती, कीर्तन एवं सत्संग की व्यवस्था।
यह धाम युगों-युगों तक भक्ति, शांति और मोक्ष की धरोहर बनकर समस्त मानवता को आलोकित करता रहे।
आपकी नियमित मासिक सेवा ही इस दिव्य कार्य को गति देगी।
जो भक्त इस निर्माण कार्य में मासिक सेवा से जुड़ेगा, वह केवल दानदाता ही नहीं,
बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मंदिर निर्माण का सह-निर्माता कहलाएगा ।



