श्री साहेब बाबा धाम - परिचय और दिव्य दर्शन

साहेब छवि हृदय धरी, कीजौ नाथ निहाल |
जयति जयति साहेब प्रभु, मंगल करण कृपाल ||

ब्रह्माण्डीय चेतना एवं सशक्तता का उद्गम स्रोत कहाँ है। इसकी खोज करते हुए तत्त्वदर्शी संत शिरोमणि श्री साहेब बाबा अपने गहन अनुसन्धानों के सहारे उस शक्ति स्रोत अचिन्त्य, अगम्य, अगोचर, परब्रह्म जगत चेतना के साथ अपना स्वरूप निर्धारित करने के लिए ही इस कलीकाल में प्रकट हुए! कुछ से सब कुछ को उत्पन्न होने का प्रथम चरण शब्दब्रह्म ही है उसी को नाद-ब्रह्म कहते हैं। उस परमसत्ता का आरम्भ अवतरण बाबा के जीवन में इस प्रकार हुआ की उसके अस्तित्व एवं प्रभाव का परिचय प्राप्त करने के लिए सृष्टि का उद्गम केंद्र शब्द ब्रह्म से समाधि की यात्रा अपने कठोर तप से सिद्ध किये तभी सृष्टि प्रवाह के साथ तारतम्य ब्रह्म भेद मिटा और आत्मज्ञान को प्राप्त हुए !!

शक्ति की धाराएँ अनेक हैं, यदि उनके उद्गम केन्द्र तक पहुँचा जा सके तो सभी धाराओं पर अधिकार प्राप्त किया जा सकता है जो उस केन्द्र के मूल से उद्भूत होता है। श्री साहेब बाबा उस मूल के जड़ की खोज कर प्रकृति तथा ब्रह्मांड के सभी शक्तियों को अपने केंद्र में कर लिए!

ज्ञान, कर्म, उपासना तीन शक्ति धाराओं के समुच्चय थे बाबा । वह शाश्वत ऊर्जा से भरे थे उनके आभा मंडल से शाश्वत दिव्य प्रकाश निकलता था एवं उनके रोम रोम से शाश्वत ब्रह्माण्ड की ध्वनि सुनाई पडती थी जिधर से भी ओ गुजरते थे हवाओ में एक दिव्य सुगंध घुल जाता था, सृजन, पोषण एवं निवारण जैसी शाश्वत शक्ति बाबा में निहित होने के कारण ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिशक्ति धाराओं के स्रोत से भी ऊपर थे वह क्योकि उनकी चेतना त्रिशक्तिओ के स्रोत की स्वयं मालिक थी बाबा स्वयं ब्रह्म थे !!

ज्ञान

ज्ञान वह बुनियादी चेतना है जो साधक को सत्य और असत्य के बीच भेद करने की क्षमता देती है। यह आत्मज्ञान की वह रोशनी है जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाती है। साहेब बाबा के संदर्भ में, ज्ञान परम ब्रह्म जगत चेतना और सृष्टि के उद्गम केंद्र शब्द ब्रह्म को समझने का मार्ग है, जिसके बिना सही दिशा में यात्रा संभव नहीं है।

कर्म

कर्म ज्ञान को व्यवहार में बदलने की क्रिया है। यह वह शुद्ध क्रिया है जो किसी भी फल की इच्छा (कामना) से मुक्त होकर, निस्वार्थ भाव से की जाती है। साहेब बाबा के दर्शन में, शुद्ध कर्म (जैसे संतसेवा और निस्वार्थ व्यवहार) ही हमारे चित्त को शुद्ध करता है और हमें अहंकार के पर्दे को हटाने में सहायता करता है, जिससे आत्मिक उन्नति होती है।

उपासना

उपासना परमसत्ता के निकट बैठने (उप+आसन) का अभ्यास है। यह ध्यान, भक्ति और निरंतर स्मरण के माध्यम से परम चेतना के साथ तारतम्य स्थापित करने की प्रक्रिया है। उपासना शक्ति की वह धारा है जो साधक को आंतरिक स्थिरता, शांति और साहेब बाबा की दिव्य शाश्वत ऊर्जा से जोड़े रखती है, जिससे ज्ञान और कर्म को सही दिशा और बल मिलता है।

भव्य मंदिर निर्माण हेतु

गर्भगृह, मंडप एवं तलाब परिक्रमा मार्ग से युक्त | दैनिक पूजन-अर्चन, महाआरती, कीर्तन एवं सत्संग की व्यवस्था।
यह धाम युगों-युगों तक भक्ति, शांति और मोक्ष की धरोहर बनकर समस्त मानवता को आलोकित करता रहे।
आपकी नियमित मासिक सेवा ही इस दिव्य कार्य को गति देगी।

जो भक्त इस निर्माण कार्य में मासिक सेवा से जुड़ेगा, वह केवल दानदाता ही नहीं,
बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मंदिर निर्माण का सह-निर्माता कहलाएगा ।

मुख्य स्थान

ग्यासपुर, सिसवन, सिवान, बिहार, भारत - 841210

ईमेल

info@sahebbabadham.org

फ़ोन

+919700000121